हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई उम्मीद बनी है—कटिंग (कलम) के माध्यम से तैयार होने वाले पौधे। अब बागवानी प्रेमियों और किसान समुदाय के बीच यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि इसमें कम समय में अधिक पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गुलाब, मनी प्लांट, तुलसी, गन्ना, करोंदा, गेंदा और कई अन्य पौधे कटिंग विधि से आसानी से उगाए जा सकते हैं। इस तकनीक में किसी स्वस्थ पौधे की शाखा काटकर उपजाऊ मिट्टी में लगाई जाती है, जिससे नया पौधा उगता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा ने बताया, “कटिंग विधि न केवल किफायती है बल्कि इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले पौधों का चयन करके गुणवत्तापूर्ण उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।”
सरकार भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है, जिससे लोग आत्मनिर्भर बन सकें और छोटे पैमाने पर नर्सरी व्यवसाय शुरू कर सकें।
कटिंग तकनीक से पौधे तैयार करना न सिर्फ पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि रोजगार और आय का साधन भी बन सकता है। यह तकनीक आने वाले समय में हरियाली बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
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- कटिंग से तैयार होने वाले पौधों ने बढ़ाई हरियाली की उम्मीद















