रायपुर, 26 अगस्त 2025 भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष गणेशोत्सव 27 अगस्त से आरंभ होगा। परंपरानुसार घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
पंडित विकास शर्मा ने बताया कि भगवान गणेशजी की स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। मान्यता है कि विधि-विधान और नियमों के साथ गणेशजी को घर में स्थापित करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
🔹 भगवान गणेश की स्थापना का सही समय
पंडित शर्मा के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न में हुआ था। इसलिए प्रतिमा स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय सुबह 10:46 से दोपहर 12:20 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त है। इस दौरान प्रतिमा की स्थापना करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
🔹 स्थापना से पहले करें ये कार्य
- घर या पंडाल में जहां मूर्ति रखी जानी है, उस स्थान को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
- लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर उस पर स्वास्तिक बनाएं और चावल व पुष्प अर्पित करें।
- गणेश प्रतिमा को उत्तर दिशा की ओर मुख कर स्थापित करें। प्रतिमा का पिछला भाग कभी भी सामने न आए।
- गणेशजी के साथ कलश की स्थापना पूर्व दिशा में करना सबसे शुभ माना जाता है।
🔹 कितने दिन तक रखें गणेश प्रतिमा
पंडित शर्मा ने बताया कि गणेशोत्सव परंपरागत रूप से 11 दिनों तक मनाया जाता है और अंतिम दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। हालांकि भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा अनुसार प्रतिमा को डेढ़, 5, 7, 11 या 21 दिनों तक भी स्थापित कर सकते हैं।
🔹 पूजा की विधि
- गणेशजी की स्थापना के बाद धूप, दीप, पुष्प और अक्षत से पूजन करें।
- मंत्रों और गणपति बप्पा के 108 नामों का जाप करें।
- घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- गणपति को घी से बने 21 मोदक का भोग लगाएं और प्रसाद सभी में बांटें।
- व्रतधारी व्यक्ति संकल्प के समय हाथ में चावल व पुष्प लेकर “मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनमहं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करें।
पंडित विकास शर्मा ने कहा कि नियमपूर्वक स्थापना और पूजा करने से गणेशजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन, धान्य व सुख-शांति का वास होता है।















